अरुण की कहानी
अरुण की कहानी, एक बड़े शहर में बहुत कहानी होती है उनमे से एक इस लड़के की, 3 मार्च शाम का समय चाय पीने गये थे में और साथ रहने वाला एक दोस्त, तो में बता दु मेने अरुण से बात ना के बराबर हि की थी, सभी बातें जो में बताने वाला हु वो सवांद दोस्त ने अरुण के साथ किया था, में केवल संवाद को लेखन का रूप दे रहा हु। अब चलते है अरुण की कहानी पर, अनाथ लड़का जुत्ते पोलिश का काम करता है, 1 से 2 साल पहले माता व पिता गुजर गए, अपने मौसी व मौसाजी के पास रहता है, खाना सुबह कम खाया हुआ था मात्र एक रोटी, शायद उसे एक रोटी हि दी गयी थी उसे भूख लग रही थी, स्कूल कभी नहीं गया था, कुल 75 रुपये कमाए थे इस दिन, दोस्त ने उसे 50 रूपए दिये उसमे से उसने हमे 20 रूपए की चाय पिला दी, ये सब में इसलिए बता रहा हु की महज 9 से 10 साल का लड़का अपना पेट भरने के लिए कैसे न कैसे संघर्ष कर रहा है लेकिन ईमानदारी से अपना काम कर रहा था, लालच उसके चेहरे पर कंही नज़र नहीं आ रहा था, मुझे तो वो पल याद आ रहा है जब उस से इतनी बाते दोस्त ने करी तो आखिर में वो भावुक हो हि गया था और उसका जाने का मन नहीं कर रहा था, मुझे लग रहा था इसका ...