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seriously read

आत्महत्या एक ऐसा शब्द जो दिल दहला देता है इसका अर्थ स्वयं को मारना इंसान किसी कारण वश ही यह कदम उठाता है लेकिन ऐसे कोनसे कारण आ जाते है जिनकी वजह से स्वयं तो मरते है पीछे उनके सहारे जी रहे लोगों को भी मरने की हालत में छोड़ जाते है लोग कहते है क्यो ये कदम लोगो द्वारा उठाया जाता है मुझे ऐसा लगता है कुछ लोग किन्ही गंभीर कारण की वजह से और कुछ भावविभोर होने की वजह से लेकिन इस विषय में आम जन को सोचना जरूरी है क्योंकि ये सरकार का विषय नही है ये व्यक्ति विशेष का विषय है तो आम जन को कहना चाहूंगा कि आपके आस पास अगर कोई व्यक्ति किन्ही कारणों के द्वारा चिंतित है तो उसे आप व्यक्तिगत तरीके से चिंता को दूर करने की कोशिश करे। यह हम सभी का कर्तव्य है जिसे हमें अनिवार्य निभाना ही है।

for my teacher

शिक्षक दिवस शिक्षक एक ऐसा शब्द है जिससे मैं ही नहीं सभी डरते है स्कूल का नाम सुनते ही वो सर याद आ जाते है जो कक्षा मैं कुछ पूछेंगे फिर न जाने के बहाने आप लोग सोचेंगे हम तो नहीं करते थे हां तो मैं करता था ना 10 वी तक तो होम वर्क मैं भी जोर आता था न याद करता डंडे भी खूब खाये है मजे भी करे है ये नई मैं कमजोर था बस जोर बहुत आता था लेकिन उन शिक्षकों को तहे दिल से धन्यवाद जिन्होंने मुझे झेला मुझे पढ़ा दिया और माता पिता का तो समय के हर पल पर आभार रहेगा आज शिक्षक की बात आ ही रही है तो सब कुछ निकाल देते है सर भी कम नई होते जिस किसी बात से गुस्सा होकर आएंगे तो आते ही धुलाई कर देंगे फिर खौफ का माहौल पैदा हो जाता है जैसे आस पास आतकवादियो ने हमला कर दिया हो वास्तव मैं कुछ तो बेवजह ही पीटते थे कुछ को ज्यादा ही प्यार मिलता था लेकिन स्कूल का हर पल शिक्षक के साथ जीने का एक अलग ही अहसास कराता है जो कि हर समय वह याद आता है आज मैं ही नहीं सब यह सोचते ही की वो पुराने पल फिर से आ जाए लेकिन समय के ऊपर किसका बस है लेकिन ये यादे जिंदगी भर बनी रहेगी तो यही कहूंगा मैं ही नहीं आप भी अपने सर ...

my first blog

गति गति क्या है दिमाग मैं इस नाम से वाहनों  गति के बारे मैं याद आता है जिसे हम रफ़्तार कह सकते है जो की कई जिन्दगिया बर्बाद  कर चुकी है  इंसान खुद की रफ़्तार इतनी तेज कर लेता है उसको सामने  वाले की जिंदगी का ख़याल नहीं  रहता हमारे देश मैं रोड दुर्घटना मैं हर  साल कितने लोगो  की जान जाती है कुछ अंदाजा नहीं है एक नियम सबका है की जब  तक कोई घटना निजी नहीं हो तब तक लोग उस बारे मैं सार्वजानिक नहीं सोचते देश मैं एक आंदोलन छिड़  जाना चाहिए इस रफ़्तार के खिलाफ सबसे ज्यादा युथ ही इसका जिम्मेदार है आज आप देखते होंगे लोग कैसे कैसे अपने वाहनों को चलाते  है उन्हें न खुद की फ़िक्र है और दुसरो की फिक्र करने का तो सवाल ही नई उठता क्योकि समय कहा है लोगो के पास हो तो भी व्यस्त का बहाना तो सब बना ही देते है तो मेरी अपील है देश के जागरूक जनप्रतिनिधीयो से और जागरूक नागरिको से की हमे बस अपने ही लोगो को समझाना है की जीवन  क्षण भर मात्र है इसे ऐसे ही न गवाए खुद भी जिए और दुसरो को भी अच्छे से जी...